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एक प्रेरणादायक कहानी जो सिखाती है कि धैर्य, अभ्यास और मेहनत से कोई भी अपने लक्ष्य तक पहुँच सकता है।

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दर्श आज बहुत excited था। आखिर इतने दिनों बाद उसका स्कूल जो खुल रहा था!
दादू उसके लिए नया school bag लाए थे, पापा नई books लाए थे और मम्मी ने उसके नए tiffin box में उसकी favourite मशरूम की सब्ज़ी और पराठे पैक किए थे।
आज का दिन दर्श के लिए बिल्कुल special था। पापा उसे स्कूल छोड़कर उसकी class तक गए।
‘Hi दर्श! तुम्हारी छुट्टियाँ कैसी गईं?’ उसके दोस्त रोहन ने पूछा।
‘Hi रोहन! बहुत मज़ेदार। मैंने इस छुट्टी में swimming सीखी, खूब cricket खेला और ढेर सारे आम खाए!’ दर्श ने खुशी से कहा।
‘वाह! मैंने drawing classes join की थीं। और हाँ, आम तो मैंने भी बहुत खाए!’ रोहन हँसते हुए बोला।
तभी first period की घंटी बजी और नई Maths teacher class में आईं।
‘Good Morning, बच्चों! आज हमारी पहली Maths class है और हम multiplication और division सीखेंगे।’ Ma'am ने कहा।
इतने बड़े-बड़े नाम सुनकर दर्श थोड़ा घबरा गया। Ma'am ने जब पढ़ाना शुरू किया, तो दर्श को कुछ भी समझ नहीं आया।
Lunch break में दर्श ने रोहन से कहा, ‘मुझे आज की Maths class में कुछ भी समझ नहीं आया।’
रोहन बोला, ‘शुरुआत में थोड़ा difficult लगता है। मेरी मम्मी ने मुझे summer vacation में पहले से सिखा दिया था, इसलिए मुझे आसानी हुई।’
रोहन पूरी class का topper था। Teachers हमेशा उसकी तारीफ़ करते थे और उसे अक्सर prizes मिलती थीं। दर्श भी उससे बहुत inspire होता था।
दर्श ने नए session की शुरुआत में तय किया था कि इस बार वह भी top करेगा। लेकिन Maths की class के बाद उसका confidence थोड़ा कम हो गया था।
उदास मन से दर्श घर पहुँचा। दादू ने उसे देखते ही पूछा, ‘अरे, क्या बात है? आज क्या तुम आम नहीं खाओगे?’
दर्श धीरे से बोला, ‘दादू, मैंने सोचा था कि मैं भी रोहन की तरह top करूँगा और scientist बनूँगा। लेकिन आज Maths की class में मुझे कुछ समझ ही नहीं आया।’
दादू मुस्कुराए और बोले, ‘दर्श, फलों का राजा कौन है?’
‘आम! ये तो सब जानते हैं,’ दर्श ने तुरंत जवाब दिया।
दादू बोले, ‘लेकिन क्या तुम जानते हो कि बहुत समय पहले आम इतना मीठा नहीं होता था? वह काफी कड़वा होता था और लोग उसे खाना भी पसंद नहीं करते थे।’
दर्श आश्चर्य से बोला, ‘सच में?’
‘हाँ,’ दादू ने कहा, ‘कुछ किसान चाचाओं ने हमेशा सबसे मीठे आमों के बीज चुनकर बोए। मानो वे आम की अच्छी आदत—उसकी मिठास—को आगे बढ़ा रहे हों।’
‘ऐसा कई सालों तक चलता रहा। आम ने भी patience रखा और धीरे-धीरे, साल दर साल, वह और मीठा होता गया।’
‘और आज वही आम फलों का राजा कहलाता है।’
दादू ने आगे कहा, ‘बिल्कुल इसी तरह तुम्हें भी अपनी अच्छी आदतों को चुनना होगा। अगर तुम रोज़ थोड़ा-थोड़ा practice करोगे, patience रखोगे और हार नहीं मानोगे, तो तुम भी अपने लक्ष्य तक ज़रूर पहुँचोगे।’
‘सोचो, अगर आम ने बीच में ही हार मान ली होती, तो क्या वह आज फलों का राजा बन पाता?’
दर्श मुस्कुराने लगा। उसने सोचा, ‘जब एक आम इतनी मेहनत करके राजा बन सकता है, तो मैं क्यों नहीं?’
उसने तुरंत पापा को phone किया और कहा, ‘पापा, आज आप office से जल्दी आना। मुझे multiplication और division सीखना है!’
पापा हँसते हुए बोले, ‘लगता है मेरा बेटा भी अब राजा बनने की तैयारी कर रहा है!’
दर्श मुस्कुराया और बोला, ‘हाँ, बिल्कुल मेरे favourite आम की तरह!’
धैर्य, नियमित अभ्यास और मेहनत से कोई भी कठिन काम आसान बन सकता है।
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